हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जामेअ मुदर्रेसीन हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम ने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अल-उज़मा सैयद अली ख़ामेनई की शहादत के चेहल्लुम के अवसर पर जारी अपने महत्वपूर्ण पैग़ाम में कहा है कि शहीद रहबर का ख़ून ईरान और उम्मत-ए-मुस्लिमा के इक़्तिदार और अज़मत को और अधिक मज़बूत करेगा, जबकि ईरान दुश्मन की ओर से पेश की जाने वाली जंगबंदी के फरेब में हरगिज़ नहीं आएगा।
जामेअ मुदर्रेसीन ने अपने बयान में मिल्लत-ए-ईरान की निरंतर प्रतिरोध, दृढ़ता और मैदान में भरपूर मौजूदगी को इमाम खुमैनी और शहीद रहबर-ए-इंकिलाब के प्रति वफ़ादारी की उज्ज्वल निशानी करार दिया। बयान में कहा गया कि अवाम के दुश्मन-शिकन समारोह विभिन्न रूपों में जारी रहने चाहिए और दुश्मन की पूरी हार तक सड़कें और मैदान ही मोर्चा-ए-जिहाद बने रहेंगे।
जामेअ मुदर्रेसीन ने इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता, आंतरिक सामंजस्य और विभाजन पैदा करने वाले मामलों से बचने पर ज़ोर देते हुए कहा कि मौजूदा संवेदनशील मरहले में हर क़िस्म की दो-फाड़ से बचना अपरिहार्य है। बयान में कहा गया कि मिल्लत को पल्ला झाड़ना और तफ़रक़ा पैदा करने वाली बातों से दूर रहते हुए एकजुटता के साथ आगे बढ़ना होगा।
पैग़ाम में यह भी कहा गया कि हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनई की क़यादत में मिल्लत अपने वफ़ा के वादे पर दृढ़ रहेगी और उन्हीं की रहनुमाई में इज़्ज़त ओ सम्मान और गौरव की नई मंज़िलों (लक्ष्यों) की ओर अग्रसर करेगी।
जामेअ मुदर्रेसीन ने ज़ोर देकर कहा कि दुश्मन अब जंगबंदी जैसे नारों के ज़रिए ईरान के इरादे को कमज़ोर करने की कोशिश करेगा, लेकिन इस्लामी ईरान इस धोखेबाज़ जंगबंदी के जाल में नहीं फंसेगा और विलायत के साये में आख़िरी मरहले तक जिहाद, क़ुरबानी और साबित-क़दमी का रास्ता जारी रखेगा।
बयान के अंत पर अल्लाह तआला से दुआ की गई कि मिल्लत-ए-ईरान को हक़ पर दृढ़ता, दूरदृष्टि और सहायता अता फरमाए और मुक़ावमत के इस तारीख़ी यात्रा को फ़तह ओ विजय और सफलता से सम्मिलित करे।
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